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साइबर ठगों ने पुराने दानदाता के नाम पर बौद्ध धार्मिक संस्थान से 6.58 लाख रुपये ठगे

➤ साइबर ठगों ने पुराने दानदाता के नाम पर बौद्ध धार्मिक संस्थान से 6.58 लाख रुपये ठगे

➤ फर्जी ई-मेल और व्हाट्सएप के जरिए परिचितों के इलाज के नाम पर की गई धोखाधड़ी

➤ असली दानदाता से संपर्क करने के बाद मामले का खुलासा हुआ और पुलिस ने जीरो एफआईआर दर्ज की


धर्मशाला के समीप स्थित एक प्रसिद्ध बौद्ध धार्मिक संस्थान में साइबर ठगी का बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। शातिर अपराधियों ने संस्थान के एक पुराने दानदाता के नाम से मिलती-जुलती फर्जी ई-मेल आईडी बनाकर संस्थान प्रबंधन को झांसे में ले लिया। फर्जी ई-मेल के जरिए ठगों ने दावा किया कि दानदाता के दो परिचित गंभीर बीमारी के आपातकालीन इलाज के लिए भारत आ रहे हैं। ठगों ने बहाना बनाया कि वे विदेशों से सीधे भारतीय बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने में असमर्थ हैं, इसलिए फिलहाल संस्थान वित्तीय मदद प्रदान करे जिसे जल्द ही वापस लौटा दिया जाएगा।

जब संस्थान की ओर से आधिकारिक खाते से सीधे भुगतान करने में असमर्थता जताई गई, तो ठगों ने चालाकी से संस्थान के निदेशक का मोबाइल नंबर हासिल कर लिया। इसके बाद आरोपियों ने व्हाट्सएप के माध्यम से निदेशक से सीधा संपर्क साधा और अपने झांसे में ले लिया। निदेशक के निर्देश मिलने पर संस्थान के छह कर्मचारियों ने ठगों द्वारा बताए गए बैंक खातों में पैसे भेजने शुरू कर दिए। छह से नौ अक्तूबर के बीच बैंक ऑफ महाराष्ट्र और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के दो अलग-अलग खातों में कुल नौ बार में 6.58 लाख रुपये की राशि ट्रांसफर कर दी गई।

इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब संस्थान प्रबंधन ने औपचारिक बातचीत के दौरान अपने वास्तविक दानदाता से संपर्क किया। जब दानदाता से इस वित्तीय सहायता और परिचितों के इलाज के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी ओर से न तो ऐसी कोई ई-मेल भेजी गई थी और न ही किसी मदद की मांग की गई थी। सच सामने आते ही संस्थान प्रबंधन में हड़कंप मच गया और कर्मचारियों को अहसास हुआ कि वे एक सोची-समझी साइबर धोखाधड़ी के शिकार हो चुके हैं।

घटना की सच्चाई पता चलते ही संस्थान प्रबंधन ने तुरंत पुलिस से संपर्क किया और पूरे घटनाक्रम की शिकायत सौंपी। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जीरो एफआईआर दर्ज कर ली है और जिन बैंक खातों में रकम ट्रांसफर हुई थी, उनकी जांच शुरू कर दी गई है। साइबर क्राइम सेल अब फर्जी ई-मेल के आईपी एड्रेस, व्हाट्सएप नंबरों की लोकेशन और बैंक खातों के धारकों की डिटेल खंगालने में जुटी हुई है ताकि शातिर ठगों को जल्द से जल्द पकड़ा जा सके।